प्रेरणार्थक क्रिया की परिभाषा, नियम और उदाहरण सहित सरल व्याख्या। परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण हिंदी व्याकरण अध्याय की संपूर्ण जानकारी।
हिंदी व्याकरण में प्रेरणार्थक क्रिया एक महत्वपूर्ण विषय है। बोर्ड परीक्षा में इससे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इसलिए इसका सही ज्ञान होना आवश्यक है। आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं।
✍️ प्रेरणार्थक क्रिया क्या है?
परिभाषा:
जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे से कार्य करवाता है, तो उस क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।
अर्थात्, जहाँ किसी से काम करवाया जाता है, वहाँ प्रेरणार्थक क्रिया होती है।
📌 उदाहरण
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माँ बच्चे से पानी भरवाती है।
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शिक्षक छात्रों से पाठ लिखवाते हैं।
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उसने नौकर से कमरा साफ करवाया।
यहाँ कार्य कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा है, लेकिन करवाने वाला कोई और है — इसलिए ये प्रेरणार्थक क्रियाएँ हैं।
🔎 प्रेरणार्थक क्रिया के प्रकार
1️⃣ प्रथम प्रेरणार्थक
जब कर्ता सीधे किसी से काम करवाता है।
उदाहरण:
2️⃣ द्वितीय प्रेरणार्थक
जब कर्ता किसी तीसरे व्यक्ति के माध्यम से कार्य करवाता है।
उदाहरण:
📝 प्रेरणार्थक क्रिया बनाने के नियम
अधिकतर प्रेरणार्थक क्रिया बनाने के लिए मूल धातु में –वा, –वाना, –वाना आदि प्रत्यय जोड़े जाते हैं।
उदाहरण:
लिखना → लिखवाना
पढ़ना → पढ़वाना
करना → करवाना
खाना → खिलवाना / खिलाना
(1) मूल धातु के अंत में आ जोड़ने से प्रथम प्रेरणार्थक और वा जोड़ने से द्वितीय प्रेरणार्थक रूप बनता है।
मूल धातू प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीयक प्रेरणार्थक
मिलना मिलाना मिळवाना
लिखना लिखाना लिखवाना
जलना जलाना जलवाना
झुकना झुकाना झुकवाना
चढना चढाना चढवाना
उडना उडाना उडवाना
गिरना गिराना गिरवाना
मूल धातू प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीयक प्रेरणार्थक
बनना बनाना बनवाना
मरना मारना मरवाना
सुनना सुनाना सुनवाना
करना कराना करवाना
पढना पढाना पढवाना
चमकना चमकाना चमकवाना
चलना चलाना चलवाना
(2) दो अक्षरों की धातु में ए अथवा ओ को छोड़कर आदि का दीर्घ स्वर हस्व हो जाता है।
मूल धातू प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीयक प्रेरणार्थक
जीतना जिताना जितवाना
मानना मनाना मनवाना
बोलना बुलाना बुलवाना
भूलना भुलाना भुलवाना
मूल धातू प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीयक प्रेरणार्थक
डूबना डुबाना डुबवाना
लुटना लुटाना लुटवाना
सीखना सिखाना सिखवाना
पीसना पिसना पिसवाना
(3) एक अक्षरवाली धातु के अंत में ला और लवा लगाकर दीर्घ स्वर हस्व कर देने से प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक रूप बनते हैं।
मूल धातू प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीयक प्रेरणार्थक
छोड़ना छुड़ाना छुड़वाना
रोना रुलाना रुलवाना
देना दिलाना दिलवाना
खेलना खिलाना खिलवाना
(4) कुछ धातुओं के प्रथम प्रेरणार्थक रूप ला अथवा आ लगाने से बनते हैं, परंतु दद्वितीय प्रेरणार्थक रूप में वा लगाया जाता है।
मूल धातू प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीयक प्रेरणार्थक
दिखना दिखाना, दिखलाना दिखवाना
कहना कहाना, कहलाना कहलवाना
सीखना सिखाना, सिखलाना सिखवाना
बैठना बिठना, बैठाना बैठवाना
सूचना : कुछ क्रियाएँ ऐसी भी होती हैं, जिनके प्रेरणार्थक रूप नहीं बनते।
जैसे - होना, आना, जाना, पाना, रहना, लजाना, सकना, चाहना, पछताना आदि।
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